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मई 01, 2025 पास्का का दूसरा सप्ताह – बृहस्पतिवार

मई 01, 2025

पास्का का दूसरा सप्ताह बृहस्पतिवार



पहला पाठ

प्रेरित-चरित 5:27-33


"इन बातों के साक्षी हम हैं और पवित्र आत्मा भी।"

प्यादों ने प्रेरितों को ले आ कर महासभा के सामने पेश किया। प्रधानयाजक ने उन से यह कहा, "हमने तुम लोगों को कड़ा आदेश दिया था कि वह नाम ले कर शिक्षा मत दिया करो, परन्तु तुम लोगों ने येरुसालेम के कोने-कोने में अपनी शिक्षा का प्रचार किया और तुम उस मनुष्य की हत्या की जिम्मेवारी हमारे सिर पर मढ़ना चाहते हो।" इस पर पेत्रुस और अन्य प्रेरितों ने यह उत्तर दिया, "मनुष्यों की अपेक्षा ईश्वर की आज्ञा का पालन करना कहीं अधिक उचित है। आप लोगों ने येसु को क्रूस पर लटका कर मार डाला था, किन्तु हमारे पूर्वजों के ईश्वर ने उन्हें पुनर्जीवित किया है। ईश्वर ने उन्हें शासक तथा मुक्तिदाता का उच्च पद दे कर अपने दाहिने बैठा दिया, जिससे वह उनके द्वारा इस्राएल को पश्चात्ताप तथा पापक्षमा प्रदान करे। इन बातों के साक्षी हम हैं और पवित्र आत्मा भी, जिसे ईश्वर ने उन लोगों को प्रदान किया है, जो उनकी आज्ञा पालन करते हैं।" यह सुन कर वे अत्यन्त क्रुद्ध हो उठे और उन्होंने प्रेरितों को मार डालने का निश्चय किया।

 

प्रभु की वाणी।

 

भजन : स्तोत्र 33:2,9,17-20

अनुवाक्य : दीन-हीन ने दुहाई दी और प्रभु ने उसकी सुनी। (अथवा : अल्लेलूया!)

 

1. मैं सदा ही प्रभु को धन्य कहूँगा, मेरा कंठ निरन्तर उसकी स्तुति करता रहेगा। परख कर देखो कि प्रभु कितना भला है। धन्य है वह, जो उसकी शरण में जाता है।

 

2. प्रभु की कृपादृष्टि धर्मियों पर बनी रहती है, वह उनकी पुकार पर कान देता है। धर्मी प्रभु की दुहाई देते हैं। वह उनकी सुनता और हर प्रकार की विपत्ति में उनकी रक्षा करता है।

 

3. प्रभु दुःखियों से दूर नहीं है। जिसका मन टूट गया, वह उन्हें सँभालता है। धर्मी विपत्तियों से घिरा रहता है, किन्तु उन सबों से प्रभु उसे छुड़ाता है।

 

जयघोष

अल्लेलूया! थोमस! क्या तुम इसलिए विश्वास करते हो कि तुमने मुझे देखा है? धन्य हैं वे, जो बिना देखे ही विश्वास करते हैं। अल्लेलूया!

 

सुसमाचार

सन्त योहन के अनुसार पवित्र सुसमाचार 3:31-36

"पिता पुत्र को प्यार करता है और उसी के हाथ में उसने सब कुछ दे दिया है।"

"जो ऊपर से आता है वह सर्वोपरि है। जो पृथ्वी से आता है, वह पृथ्वी का है और पृथ्वी की बातें बोलता है। जो स्वर्ग से आता है, वह सर्वोपरि है। उसने जो कुछ देखा और सुना है, वह उसी का साक्ष्य देता है; किन्तु कोई भी उसका साक्ष्य स्वीकार नहीं करता। जो उसका साक्ष्य स्वीकार करता है, वह ईश्वर की सत्यता प्रमाणित करता है। जिसे ईश्वर ने भेजा है, वह ईश्वर के ही शब्द बोलता है, क्योंकि ईश्वर उसे प्रचुर मात्रा में पवित्र आत्मा प्रदान करता है। पिता पुत्र को प्यार करता है और उसी के हाथ उसने सब कुछ दे दिया है। जो पुत्र में विश्वास करता है, उसे अनन्त जीवन प्राप्त है। परन्तु जो पुत्र में विश्वास करने से इनकार करता है, उसे जीवन प्राप्त नहीं होगा। ईश्वर का क्रोध उस पर बना रहेगा।

 

प्रभु का सुसमाचार।


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अप्रैल 30, 2025 पास्का का दूसरा सप्ताह – बुधवार

 

अप्रैल 30, 2025

पास्का का दूसरा सप्ताह बुधवार





पहला पाठ 
 प्रेरित-चरित 5:17-26

"आप लोगों ने जिन व्यक्तियों को बन्दीगृह में डाल दिया था, वे मंदिर में जनता को शिक्षा दे रहे हैं।"

प्रधानयाजक और उसके सब संगी-साथी, अर्थात् सदूकी सम्प्रदाय के सदस्य, ईर्ष्या से जलने लगे। उन्होंने प्रेरितों को गिरफ्तार कर सरकारी बन्दीगृह में डाल दिया। परन्तु ईश्वर के दूत ने रात को बन्दीगृह के द्वार खोल दिये और प्रेरितों को बाहर ले जा कर यह कहा, "जाइए और निडर हो कर मंदिर में जनता को इस नवजीवन की पूरी-पूरी शिक्षा सुनाइए।" उन्होंने यह बात मान ली और भोर होते ही वे मंदिर जा कर शिक्षा देने लगे। जब प्रधानयाजक और उसके संगी-साथी आये, तो उन्होंने महासभा अर्थात् इस्राएली नेताओं की सर्वोच्च परिषद् बुलायी और प्रेरितों को ले आने के लिए प्यादों को बन्दीगृह भेजा। जब प्यादे वहाँ पहुँचे, तो उन्होंने प्रेरितों को बन्दीगृह में नहीं पाया। उन्होंने लौट कर यह समाचार दिया, "हमने देखा कि बन्दीगृह बड़ी सावधानी से बन्द किया हुआ है और पहरेदार फाटकों पर तैनात हैं, किन्तु खोलने पर हमें भीतर कोई भी नहीं मिला।" यह सुन कर मंदिर-आरक्षी के नायक और महायाजक यह नहीं समझ पा रहे थे कि प्रेरितों का क्या हुआ है। इतने में किसी ने आ कर उन्हें यह समाचार दिया, “देखिए, आप लोगों ने जिन व्यक्तियों को बन्दीगृह में डाल दिया था, वे मंदिर में जनता को शिक्षा दे रहे हैं।" इस पर मंदिर का नायक अपने प्यादों के साथ जा कर प्रेरितों को ले आया। वे प्रेरितों को बलपूर्वक नहीं ले आये, क्योंकि वे लोगों से डरते थे कि कहीं हम पर पथराव न करें।

 

प्रभु की वाणी।

भजन : स्तोत्र 33:2-9


अनुवाक्य : दीन-हीन ने दुहाई दी और प्रभु ने उसकी सुनी। (अथवा : अल्लेलूया!)

 

1. मैं सदा ही प्रभु को धन्य कहूँगा, मेरा कंठ निरन्तर उसकी स्तुति करता रहेगा। मेरी आत्मा प्रभु पर गौरव करेगी। विनम्र, सुन कर, आनन्दित हो उठेंगे।

 

2. मेरे साथ प्रभु की महिमा का गीत गाओ, हम मिल कर उसके नाम की स्तुति करें। मैंने प्रभु को पुकारा। उसने मेरी सुनी। और मुझे हर प्रकार के भय से मुक्त कर दिया।

 

3. जो प्रभु की ओर दृष्टि लगाता है, वह आनन्दित होगा उसे कभी लज्जित नहीं होना पड़ेगा। दीन-हीन ने प्रभु की दुहाई दी। प्रभु ने उसकी सुनी और उसे हर प्रकार की विपत्ति से बचा लिया।

 

4. प्रभु का दूत उसके भक्तों के पास डेरा डाल कर उनकी रक्षा करता है। परख कर देखो कि प्रभु कितना भला है। धन्य है वह, जो उसकी शरण में जाता है।

 

सुसमाचार

जयघोष

अल्लेलूया! ईश्वर ने संसार को इतना प्यार किया कि उसने उसके लिए अपने एकलौते पुत्र को अर्पित कर दिया, जिससे जो कोई उस में विश्वास करे, वह अनन्त जीवन प्राप्त करे। अल्लेलूया!

 

सन्त योहन के अनुसार पवित्र सुसमाचार 3:16-21

"ईश्वर ने अपने पुत्र को इसलिए भेजा है कि संसार उसके द्वारा मुक्ति प्राप्त करे।"

"ईश्वर ने संसार को इतना प्यार किया कि उसने उसके लिए अपने एकलौते पुत्र को अर्पित कर दिया, जिससे जो कोई उस में विश्वास करे, उसका सर्वनाश न हो, बल्कि वह अनन्त जीवन प्राप्त करे। ईश्वर ने अपने पुत्र को संसार में इसलिए नहीं भेजा है कि वह संसार को दोषी ठहराये। उसने उसे इसलिए भेजा है कि संसार उसके द्वारा मुक्ति प्राप्त करे। "जो पुत्र में विश्वास करता है, वह दोषी नहीं ठहराया जाता है। जो विश्वास नहीं करता, वह दोषी ठहराया जा चुका है, क्योंकि वह ईश्वर के एकलौते पुत्र के नाम में विश्वास नहीं करता। दण्डाज्ञा का कारण यह है कि ज्योति संसार में आयी है और मनुष्यों ने ज्योति की अपेक्षा अंधकार को अधिक पसंद किया, क्योंकि उनके कर्म बुरे थे। जो बुराई करता है, वह ज्योति से बैर रखता है और ज्योति के पास इसलिए नहीं आता कि कहीं उसके कर्म प्रकट न हो जायें। किन्तु जो सत्य पर चलता है, वह ज्योति के पास आता है जिससे यह प्रकट हो कि उसके कर्म ईश्वर की प्रेरणा से हुए हैं।"

 

प्रभु का सुसमाचार।


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अप्रैल 29, 2025 पास्का का दूसरा सप्ताह, मंगलवार

 

 

 

अप्रैल 29, 2025

पास्का का दूसरा सप्ताह, मंगलवार



पहला पाठ

प्रेरित-चरित 4:32-37

"एकहृदय और एकप्राण।"

विश्वासियों का समुदाय एकहृदय और एकप्राण था। कोई भी अपनी सम्पत्ति अपनी ही नहीं समझता था। जो कुछ उनके पास था, उस में सबों का साझा था। प्रेरित बड़ी शक्ति से प्रभु येसु के पुनरुत्थान का साक्ष्य देते रहते थे। जनता उन सबों को बहुत मानती थी। उन में कोई कंगाल नहीं था, क्योंकि जिनके पास खेत या मकान थे, वे उन्हें बेच देते थे। और कीमत ला कर प्रेरितों के चरणों में अर्पित करते थे। प्रत्येक को उसकी आवश्यकता के अनुसार बाँटा जाता था। योसेफ नामक लेवी-वंशी का जन्म कुप्नुस में हुआ था। प्रेरितों ने उसका उपनाम बरनाबस अर्थात् सान्त्वना-पुत्र रखा था। उसके एक जमीन थी। उसने उसे बेच दिया और उसकी कीमत ला कर प्रेरितों के चरणों में अर्पित कर दिया।

प्रभु की वाणी।

भजन : स्तोत्र 92:1-2

अनुवाक्य : प्रभु, प्रताप से विभूषित होकर, राज्य करता है। (अथवा : अल्लेलूया!

1. प्रभु, प्रताप से विभूषित हो कर, राज्य करता है। उसने सामर्थ्य धारण कर लिया है।

2. तूने पृथ्वी को सुदृढ़ और सुस्थिरं बनाया है। तेरा सिंहासन प्रारंभ से ही सुदृढ़ है।

3. हे प्रभु! तेरे आदेश अपरिवर्तनीय हैं। तेरे मंदिर की पवित्रता अनन्तकाल तक बनी रहेगी।

सुसमाचार

जयघोष

अल्लेलूया! मानव पुत्र को ऊपर उठाया जाना है, जिससे जो कोई उस में विश्वास करे, वह अनन्त जीवन प्राप्त करे। अल्लेलूया!

योहन के अनुसार पवित्र सुसमाचार 3:7-15

"मानव पुत्र स्वर्ग से उतरा है। उसके सिवा कोई भी स्वर्ग नहीं पहुँचा है।"

येसु ने निकोदेमुस से कहा, "आप को दुबारा जन्म लेना है। पवन जिधर चाहता है, उधर बहता है। आप उसकी आवाज सुनते हैं, किन्तु यह नहीं जानते कि वह किधर से आता और किधर जाता है। वह, जो आत्मा से जन्मा है, ऐसा ही है।" निकोदेमुस ने उन से पूछा, "यह कैसे हो सकता है? येसु ने उसे उत्तर दिया, "इस्राएल के गुरु होते हुए भी आप यह नहीं समझ सकते हैं? मैं आप से कहे देता हूँ हम जो जानते हैं, वही कहते हैं और हमने जो देखा है, उसी का साक्ष्य देते हैं; किन्तु आप लोग हमारा साक्ष्य स्वीकार नहीं करते। मैंने आप को पृथ्वी की बातें बतायीं और आप विश्वास नहीं करते। यदि मैं आप को स्वर्ग की बातें बताऊँ, तो आप कैसे विश्वास करेंगे? "मानव पुत्र स्वर्ग से उतरा है। उसके सिवा कोई भी स्वर्ग नहीं पहुँचा है। जिस तरह मूसा ने मरुभूमि में साँप को ऊपर उठाया था, उसी तरह मानव पुत्र को भी ऊपर उठाया जाना है, जिससे जो कोई उस में विश्वास करे, वह अनन्त जीवन प्राप्त करे।"

प्रभु का सुसमाचार।


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पुण्य शुक्रवार † अप्रैल 18, 2025*

 *✞ GOD'S WORD ✞*

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*अप्रैल 18, 2025*


† *पुण्य शुक्रवार* †



*पहला पाठ*


_मनुष्य दुःख-तकलीफ का कारण नहीं समझता है। येसु हमें दुःख-सम्बन्धी दर्शनशास्त्र देने नहीं आये। वह हमें दुःख पर विजय प्राप्त करने की शक्ति प्रदान करने आये हैं। उनका उदाहरण देख कर हम समझ सकते हैं कि स्वर्ग के रास्ते में दुःख बाधक नहीं, बल्कि सहायक है।_


*नबी इसायस का ग्रंथ 52:13-53:12*


_“हमारे पापों के कारण वह छेदित किया गया।”_



देखो! मेरे सेवक का नाम फैल जायेगा; वह महिमान्वित किया जायेगा और अत्यन्त महान्‌ होगा। उसकी आकृति इतनी विरूपित की गयी थी कि वह मनुष्य नहीं जान पड़ता था; लोग देख कर दंग रह गये थे। उसी की ओर बहुत-से राष्ट्र आश्चर्य-चकित हो कर देखेंगे और उसी के सामने राजा मौन रहेंगे। क्योंकि उनके सामने एक आपूर्व दृश्य आ जायेगा और जो बात कभी सुनने में नहीं आयी, वे उसे अपनी आँखों से देखेंगे। कौन हमारे संदेश पर विश्वास करेगा? प्रभु का सामर्थ्य किस पर प्रकट हुआ है? वह हमारे सामने एक छोटे-से पौधे की तरह, सूखी भूमि की जड़ की तरह बढ़ गया। हमने उसे देखा था, उस में न तो सुन्दरता थी, न तेज और न कोई आकर्षण ही था। वह मनुष्यों द्वारा निन्दित और तिरस्कृत था, शोक का मारा और अत्यन्त दुःखी था। लोग जिन्हं देख कर मुँह फेर लेते हैं, उन्हीं की तरह वह तिरस्कृत और तुच्छ समझा जाता था। परन्तु वह हमारे ही रोगों को अपने ऊपर लेता था। और हमारे ही दुःखों से लदा हुआ था। और हम उसे दण्डित, ईश्वर का मारा हुआ और तिरस्कृत समझते थे। हमारे पापों के कारण वह छेदित किया गया; हमारे कुकर्मों के कारण वह कुचल दिया गया है। जो दण्ड वह भोगता था, उसके द्वारा हमें शांति मिली है और उसके घावों द्वारा हम भले-चंगे हो गये हैं। हम सब अपना-अपना रास्ता ले कर भेड़ों की तरह भटंक रहे थे। उसी पर प्रभु ने हम सबों के पापों का भार डाल दिया। वह अपने पर किया हुआ अत्याचार धैर्य से सहता गया और चुप रहा। वध के लिए ले जाये जाने वाले मेमने की तरह और ऊन कतरने वाले के सामने चुप रहने वाली भेड़ की तरह उसने अपना मुँह नहीं खोला। वे उसे बन्दीगृह और अदालत को ले गये; कोई भी उसकी परवाह नहीं करता था। वह जीवितों के बीच में से उठा लिया गया है और हमारे पापों के कारण वह मार डाला गया है। यद्यपि उसने कोई अन्याय नहीं किया था। और उसके मुँह से कभी छल-कपट की बात नहीं निकली थी किन्तु उसकी कब्र विधर्मियों के बीच बनायी गयी है और वह पापियों के साथ दफ़नाया गया है। प्रभु ने चाहा कि वह दुःख से रौंदा जाये। उसने प्रायश्चित के रूप में अपना जीवन अर्पित किया; इसलिए उसका वंश बहुत दिनों तक बना रहेगा और उसके द्वारा प्रभु की इच्छा पूरी होगी। वह अपने दुःखभोग का परिणाम देख कर सन्तुष्ट होगा। उसने दुःख सह कर जिन लोगों का अधर्म अपने ऊपर ले लिया था, वह उन्हें उनके पापों से मुक्त करेगा। इसलिए मैं उसे विरासत के रूप में बहुतों को प्रदान कंरूँगा और वह शक्तिशाली राजाओं के साथ लूट का माल बाँट लेगा। क्योंकि उसने बहुतों के अपराध अपने ऊपर लेते हुए और पापियों के लिए प्रार्थना करते हुए अपने को बलि चढ़ा दिया और उसकी गिनती कुकर्मियों में हुई।


प्रभु की वाणी।

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*भजन*

स्तोत्र 30:2,6,12-13,15-17,25


*अनुवाक्य : हे पिता! मैं अपनी आत्मा को तेरे हाथों सौंप देता हूँ।*


1. हेप्रभु! मैं तेरी शरण में आया हूँ! मुझे कभी निराश न होने दे। तू सत्यप्रतिज्ञ है, मेरा उद्धार कर। मैं अपनी आत्मा को तेरे हाथों सौंप देता हूँ। हे प्रभु! तू ही मेरा उद्धार करेगा।


2. मेरे विरोधी मेरा उपहास करते हैं; मेरे पड़ोसी मुझ से घृणा करते हैं; मेरे परिचित मुझ से डर जाते हैं। जो मुझे रास्ते में देखते हैं, वे भाग जाते हैं। मैं मुरदे की तरह भुला दिया गया हूँ; टूटे घड़े की तरह फेंक दिया गया हूँ।


3. हे प्रभु! तुझ पर ही मेरा भरोसा है। मैंने कहा - तू ही मेरा ईश्वर है। तेरे ही हाथों मेरा भाग्य है। शत्रुओं और अत्याचारियों से मुझे बचा।


4. अपने सेवक पर दयादृष्टि कर। तू दयासागर है, मुझे बचाने की कृपा कर। जो प्रभु पर भरोसा रखते हैं, वे सब के सब साहसपूर्वक ढारस रखें।

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 *दूसरा पाठ* 


_येसु ने हमें इतना प्यार किया कि वह हमारे लिए मनुष्य बन गये और क्रूस पर मर गये। हम उनके प्रेम पर दृढ़तापूर्वक विश्वास करें। हम उनकी सहायता से अपना दुःख धीरज के साथ सह सकेंगे।_


*इब्रानियों के नाम पत्र 4:14-16; 5:7-9*


_“उन्होंने आज्ञापालन सीख लिया और वह उन सबों के लिए मुक्ति का स्त्रोत बन गये, जो उनकी आज्ञाओं का पालन करते हैं।”_


भाइयो! हमारे एक अपने महान्‌ सहायक हैं, अर्थात्‌ ईश्वर के पुत्र येसु, जो स्वर्ग पहुँच गये हैं। इसलिए हम अपने विश्वास में सुदृढ़ रहें। हमारे महायाजक हमारी दुर्बलताओं में हम से सहानुभूति रख सकते हैं क्योंकि पाप को छोड़ कर सभी बातों में हमारी ही तरह उनकी परीक्षा ली गयी है। इसलिए हम भरोसे के साथ अनुग्रह के सिंहासन के पास जायें जिससे हमें दया मिल जाये और हम वह कृपा प्राप्त करें जो हमारी आवश्यकताओं में हमारी सहायता करेगी। येसु ने इस पृथ्वी पर रहते समय पुकार-पुकार कर और आँसू बहा कर ईश्वर से, जो उन्हें मृत्यु से बचा सकता था, प्रार्थना और अनुनय-विनय की है। श्रद्धालुता के कारण उनकी प्रार्थना सुनी गयी। ईश्वर का पुत्र होने पर भी उन्होंने दुःख सह कर आज्ञापालन सीख लिया। वह पूर्ण रूप से सिद्ध बन कर उन सबों के लिए अनन्त मुक्ति का स्रोत बन गये, जो उनकी आज्ञाओं का पालन करते हैं।


प्रभु की वाणी।

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*जयघोष*

फ़िल० 2:8-9

मसीह हमारे लिए मरण तंक, हाँ क्रूस के मरण तक, आज्ञाकारी बने। इसलिए ईश्वर ने उन को महान्‌ बना दिया है और उन को वह नाम प्रदान किया है, जो सब नामों में श्रेष्ठ है।

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 *सुसमाचार* 


*योहन के अनुसार प्रभु येसु का दुःखभोग 18:1-19,42*


येसु अपने शिष्यों के साथ केद्रोन नाले के उस पार गये। वहाँ एक बारी थी; उन्होंने अपने शिष्यों के साथ उस में प्रवेश किया। उनके विश्वासघाती यूदस को भी वह जगह मालूम थी, क्योंकि येसु अकसर अपने शिष्यों के साथ वहाँ गये थे। इसलिए यूदस पलटन और महायाजकों तथा फरीसियों के भेजे हुए प्यादों के साथ वहाँ आ पहुँचा। वे लोग लालटेनें, मशालें और हथियार लिये थे। येसु, यह जान कर कि मुझ पर क्या-क्या बीतेगी, आगे बढ़े और उन से बोले, “किसे ढूँढ़ते हो!” उन्होंने उत्तर दिया, "'येसु नाजरी को"। येसु ने उन से कहा, “मैं ही हूँ”। वहाँ उनका विश्वासघाती यूदस भी उन लोगों के साथ खड़ा था। जब येसु ने उन से कहा, “मैं ही हूँ”। तो वे पीछे हट कर भूमि पर गिर पड़े। येसु ने उन से फिर पूछा, “किसे ढूँढ़ते हो?” वे बोले, “'येसु नाजरी को “। इस पर येसु ने कहा, “'मैं तुम लोगों से कह चुका हूँ कि मैं ही हूँ। यदि तुम मुझे ढूँढ़ते हो, तो इन्हें जाने दो”। यह इसलिए हुआ कि उनका यह कथन पूरा हो जाये - तूने जिन्हें मुझे सौंपा है, मैंने उन में से एक का भी सर्वनाश नहीं होने दिया। उस समय सिमोन पेत्रुस ने अपनी तलवार खींच ली और प्रधानयाजक के नौकर पर चला कर उसका दाहिना कान उड़ा दिया। उस नौकर का नाम मलकुस था। येसु ने पेत्रुस से कहा, 'तलबवार म्यान में कर लो। जो प्याला पिता ने मुझे दिया है, क्या मैं उसे नहीं पिउँ!” तब पलटन, कप्तान और यहूदियों के प्यादों ने येसु को पकड़ कर बाँध लिया। वे उन्हें पहले अन्नास के यहाँ ले गये, क्योंकि वह उस वर्ष के प्रधानयाजक कैफस का ससुर था। यह वहीं कैफस था, जिसने यहूदियों को यह परामर्श दिया था - अच्छा यही है कि राष्ट्र के लिए एक ही मनुष्य मर जाये। सिमोन पेत्रुस और एक दूसरा शिष्य येसु के पीछे-पीछे चले। यह शिष्य प्रधानयाजक का परिचित था और येसु के साथ प्रधानयाजक के प्रांगण में चला गया, किन्तु पेत्रुस फाटक के पास बाहर खड़ा रहा। इसलिए वह दूसरा शिष्य, जो प्रधानयाजक का परिचित था, फिर बाहर गया और द्वारपाली से कह कर पेत्रुस को भीतर ले आया। द्वारपाली ने पेत्रुस से कहा, “कहीं तुम भी तो उस मनुष्य के शिष्य नहीं हो?” उसने उत्तर दिया, “नहीं हूँ। जाड़े के कारण नौकर और प्यादे आग सुलगा कर ताप रहे थे। पेत्रुस भी उनके साथ आग तापने लगा। प्रधानयाजक ने येसु से उनके शिष्यों और उनकी शिक्षा के विषय में पूछा। येसु ने उत्तर दिया, “मैं संसार के सामने प्रकट रूप से बोला हूँ। मैंने सदा सभागृह और मंदिर में, जहाँ सब यहूदी एकत्र हुआ करते हैं, शिक्षा दी है; मैंने गुप्त रूप से कुछ नहीं कहा। यह आप मुझ से क्यों पूछते हैं? उन से पूछ लीजिए, जिन्होंने मेरी शिक्षा सुनी है; वे जानते हैं कि मैंने क्या कहा है।” इस पर पास खड़े प्यादों में से एक ने येसु को थप्पड़ मार कर कहा, “तुम प्रधानयाजक को इस तरह जवाब देते हो?” येसु ने उस से कहा, “यदि मैंने गलत कहा, तो गलती बता दो; और यदि ठीक कहा, तो मुझे क्यों मारते हो?” इसके बाद अन्नास ने बाँधे हुए येसु को प्रधानयाजक कैफस के पास भेज दिया सिमोन पेत्रुस उस समय आग ताप रहा था। कुछ लोगों ने उस से कहा, “कहीं तुम भी तो उसके शिष्य नहीं हो?” उसने अस्वीकार करते हुए कहा, “नहीं हूँ”। प्रधानयाजक का एक नौकर उस व्यक्ति का संबंधी था जिसका कान पेत्रुस ने उड़ा दिया था। उसने कहा, “क्या मैंने तुम को उसके साथ बारी में नहीं देखा था?” पेत्रुस ने फिर अस्वीकार किया और उसी क्षण मुरगे ने बाँग दी। तब वे येसु को कैफस के यहाँ से राज्यपाल के भवन ले गये। अब भोर हो गया था । उन्होंने इसलिए भवन में प्रवेश नहीं किया कि वे अशुद्ध न हो जायें बल्कि पास्का का मेमना खा सकें। पिलातुस बाहर आ कर उन से मिला और बोला, “आप लोग इस मनुष्य पर कौन-सा अभियोग लगाते हैं?” उन्होंने उत्तर दिया, “यदि यह कुकर्मी नहीं होता, तो हमने इसे आपके हवाले नहीं किया होता”। पिलातुस ने उन से कहा, “आप लोग इसे ले जाइए, और अपनी संहिता के अनुसार इसका न्याय कीजिए। यहूदियों ने उत्तर दिया, “हमें किसी को प्राणदण्ड देने का अधिकार नहीं है”। यह इसलिए हुआ कि येसु का वह कथन पूरा हो जाये, जिसके द्वारा उन्होंने संकेत किया था कि उनकी मृत्यु किस प्रकार की होगी। तब पिलातुस ने भवन में वापस जा कर येसु को बुला भेजा और उन से कहा, “क्या तुम यहूदियों के राजा हो?” येसु ने उत्तर दिया, “क्या आप यह अपनी ओर से कहते हैं या दूसरों ने आप से मेरे विषय में यह कहा है?” पिलातुस ने कहा, “क्या मैं यहूदी हूँ? तुम्हारे ही लोगों ने और महायाजकों ने तुम्हें मेरे हवाले कर दिया है; तुमने क्या किया है?” येसु ने उत्तर दिया, “मेरा राज्य इस संसार का नहीं है। यदि मेरा राज्य इस संसार का होता, तो मेरे अनुयायी लड़ते और मैं यहूदियों के हवाले नहीं किया जाता। परन्तु मेरा राज्य यहाँ का नहीं है।” इस पर पिलातुस ने उन से कहा, “तो, तुम राजा हो?” येसु ने उत्तर दिया, “आप ठीक कहते हैं। मैं राजा हूँ। में इसलिए जन्मा और इसलिए संसार में आया हूँ कि सत्य के विषय में साक्ष्य दूँ। जो सत्य के पक्ष में है, वह मेरी सुनता है”। पिलातुस ने उन से कहा, “सत्य क्या है?” वह यह कह कर फिर बाहर गया और यहूदियों के पास आ कर उसने उन से कहा, “मैं तो उस में कोई भी दोष नहीं पाता हूँ, लेकिन तुम्हारे लिए पास्का के अवसर पर एक बन्दी को रिहा करने की प्रथा है। क्या तुम लोग चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिए यहूदियों के राजा को रिहा कर दूँ?” इस पर वे फिर चिल््ला ने लगे, “इसे नहीं; बराब्बस को”। बराब्बसं तो डाकू था। तब पिलातुस ने येसु को ले जा कर कोडे लगाने का आदेश दिया। सैनिकों ने काँटों का मुकुट गूँथ कर उनके सिर पर रख दिया और उन्हें बैंगनी कपड़ा पहनाया। फिर वे उनके पास आ-आ कर कहने लगे, “यहूदियों के राजा, प्रणाम।” और वे उन्हें थप्पड़ मारते जाते थे। पिलातुस ने फिर बाहर जा कर लोगों से कहा, “देखो, मैं उसे तुम लोगों के सामने बाहर ले आता हूँ, जिससे तुम यह जान लो कि मैं उस में कोई भी दोष नहीं पाता हूँ”। तब येसु काँटों का मुकुट और बैंगनी कपड़ा पहने बाहर आये। पिलातुस ने लोगों से कहा, “यही है वह मनुष्य!” महायाजक और प्यादे उन्हें देखते ही चिल्ला उठे, “इसे क्रूस दीजिए! इसे क्रूस दीजिए!” पिलातुस ने उन से कहा, “तुम्हीं इसे ले जाओ और क्रूस पर चढ़ाओ। मैं तो इस में कोई भी दोष नहीं पाता”। यहूदियों ने उत्तर दिया, “हमारी एक संहिता है और उस संहिता के अनुसार यह प्राणदण्ड के योग्य है, क्योंकि इसने ईश्वर का पुत्र होने का दावा किया है”। पिलातुस यह सुन कर और भी डर गया। उसने फिर भवन के अन्दर जा कर येसु से पूछा, “तुम कहाँ के हो?” किन्तु येसु ने उसे कोई उत्तर नहीं दिया। इस पर पिलातुस ने उन से कहा, “तुम मुझ से क्यों नहीं बोलते? क्या तुम यह नहीं जानते कि मुझे तुम को रिहा कर देने का भी अधिकार है और तुम को क्रूस पर चढ़वाने का भी?” येसु ने उत्तर दिया, “यदि आप को ऊंपर से अधिकार न दिया गया होता, तो आपका मुझपर कोई अधिकार नहीं होता। इसलिए जिसने मुझे आपके हवाले कर दिया है, वह अधिक दोषी है।” उस समय से पिलातुस येसु को मुक्त करने का उपाय ढूँढ़ने लगा, परन्तु यहूदी चिल्ला कर कहने लगे, “यदि आप इसे रिहा करते हैं, तो आप कैसर के हितैषी नहीं हैं। जो अपने को राजा कहता है, वह कंसर का विरोध करता है”। यह सुन कर पिलातुस ने येसु को बाहर ले आने का आदेश दिया। वह अपने न्यायासन पर उस जगह, जो लिथोसत्रोतोस और इब्रानी में गब्बथा कहलाती है, बैठ गया। पास्का की तैयारी का दिन था। लगभग दोपहर का समय था। पिलातुस ने यहूदियों से कहा, “यही है तुम्हारा राजा!” इस पर वे चिल्ला उठे, “ले जाइए! ले जाइए! इसे क्रूस दीजिए!” पिलातुस ने उन से कहा, “क्या मैं तुम्हारे राजा को क्रूस पर चढ़वा दूँ?” महायाजकों ने उत्तर दिया, “'कैसर के सिवा हमारा कोई राजा नहीं!” तब पिलातुस ने येसु को क्रूस पर चढ़ाने के लिये उनके हवाले कर दिया । वे येसु को ले गये और वह अपना क्रूस ढोते हुए ’खोपड़ी की जगह' नामक स्थान गये; इब्रानी में उसका नाम गोलगोथा है। वहाँ उन्होंने येसु को और उनके साथ और दो व्यक्तियों को क्रूस पर चढ़ाया; एक को इस ओर, दूसरे को उस ओर और बीच में येसु को। पिलातुस ने एक दोषपत्र भी लिखवा कर क्रूस पर लगवा दिया। वह इस प्रकार था - येसु नाजरी, यहूदियों का राजा। बहुत-से यहूदियों ने यह दोषपत्र पढ़ा; क्योंकि वह स्थान, जहाँ येसु क्रूस पर चढ़ाये गये थे, शहर के पास ही था और दोषपत्र इब्रानी, लातीनी और युनानी भाषा में लिखा हुआ था । इसलिए यहूदियों के महायाजकों ने पिलातुस से कहा, “आप न लिखिए - यहूदियों का राजा; बल्कि - इसने कहा कि मैं यहूदियों का राजा हूँ”। पिलातुस ने उत्तर दिया, “मैंने जो लिख दिया, सो लिख दिया"। येसु को क्रूस पर चढ़ाने के बाद सैनिकों ने उनके कपडे ले लिये और कुरते के सिवा उन कपड़ों के चार भाग कर दिये - हर सैनिक के लिए एक भाग। उस कुरते में सीवन नहीं था; वह ऊपर से नीचे तक पूरा का पूरा बुना हुआ था। उन्होंने आपस में कहा, “हम इसे नहीं फाड़ें; चिट्ठी डाल कर देख लें कि यह किसे मिलता है”। यह इसलिए हुआ कि धर्मग्रंथ का यंह कथन पूरा हो जाये - उन्होंने मेरे कपड़े आपस में बाँट लिये और मेरे वस्त्र पर चिट्ठी डाली। सैनिकों ने ऐसा ही किया। येसु की माता, उसकी बहन, क्लोपस की पत्नी मरियम और मरियम मगदलेना उनके क्रूस के पास खड़ी थीं। येसु ने अपनी माता को और उसके पास अपने शिष्य को, जिसे वह प्यार करते थे, देखा। उन्होंने अपनी माता से कहा, “भद्रे, यह आपका पुत्र है”। इसके बाद उन्होंने उस शिष्य से कहा, “यह तुम्हारी माता है”। उस समय से उस शिष्य ने उसे अपने यहाँ आश्रय दिया । तब येसु ने, यह जान कर कि अब सब कुछ पूरा हो चुका है, धर्मग्रंथ का लेख पूरा करने के उद्देश्य से कहा, “मैं प्यासा हूँ।” वहाँ खट्टी अंगूरी से भरा एक पात्र रखा था; लोगों ने उस में एक पनसोख्ता डुबाया और उसे जूफे की डण्डी पर रख कर येसु के मुँह से लगा दिया। येसु ने खट्टी अंगूरी चख कर कहा, '“सब पूरा हो चुका है” और सिर झुका कर प्राण त्याग दिये । वह तैयारी का दिन था। यहूदी यह नहीं चाहते थे कि शव विश्राम के दिन क्रूस पर रह जायें, क्योंकि उस विश्राम के दिन बड़ा त्योहार पड़ता था। उन्होंने पिलातुस से निवेदन किया कि उनकी टाँगें तोड़ दी जायें और शव हटा दिये जायें। इसलिए सैनिकों ने आ कर येसु के साथ क्रूस पर चढ़ाये हुए पहले व्यक्ति की टाँगें तोड़ दीं, फिर दूसरे की भी। जब उन्होंने येसु के पास आ कर देखा कि वह मर चुके हैं, तो उन्होंने उनकी टाँगें नहीं तोड़ीं; लेकिन एक सैनिक ने उनकी बगल में भाला मारा और उस में से तुरन्त रक्त और जल बह निकला । जिसने यह देखा है, वहीं इसका साक्ष्य देता है और उसका साक्ष्य सच्चा है। वह जानता है कि मैं सच बोलता हूँ, जिससे आप लोग भी विश्वास करें यह इसलिए हुआ कि धर्मग्रंथ का यह कथन पूरा हो जाये - उसकी एक भी हड्डी नहीं तोड़ी जायेगी; फिर धर्मग्रंथ का एक दूसरा कथन इस प्रकार है - उन्होंने जिसे छेदा है, वे उसी की ओर देखेंगे। इसके बाद अरिमथिया के यूसुफ ने, जो यहूदियों के भय के कारण येसु का गुप्त शिष्य था, पिलातुस से येसु का शव ले जाने की अनुमति माँगी। पिलातुस ने अनुमति दे दी। इसलिए यूसुफ आ कर येसु का शव ले गया। निकोदेमुस भी पहुँचा, जो पहले रात को येसु से मिलने आया था। वह लगभग पचास सेर का गंधरस और अंगूर का संमिश्रण लाया। उन्होंने येसु का शव लिया और, यहूदियों की दफन की प्रथा के अनुसार, उसको सुगंधित द्रव्यों के साथ छालटी की पट्टियों में लपेटा। जहाँ येसु क्रूस पर चढ़ाये गये थे, वहाँ एक बारी थी और उस बारी में एक नयी कब्र, जिस में अब तक कोई भी नहीं रखा गया था। उन्होंने येसु को वहीं रख दिया, क्योंकि वह यहूदियों के लिए तैयारी क़ा दिन था और वह कब्र निकट ही थी।


प्रभु का सुसमाचार।


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        *Have a Blessed Day*

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